Tuesday, November 6, 2018

की जमकर हो रही है खरीददारी, 500 करोड़ तक पहुंचा कारोबार

वायुमंडल में मौजूद प्रदूषण के कई तत्व अलग-अलग तरह से सेहत पर असर डालते हैं. बानगी के तौर पर देखें तो PM कण से अस्थमा, हृदय रोग, कैंसर होने की आशंका होती है. वहीं  कार्बन डायऑक्साइड  से सुस्ती, भूलने की बीमारी., ओजोन से आंखों में जलन, सांस और फेफड़े से संबंधित रोग होते हैं, जबकि सल्फर डायऑक्साइड से सांस लेने में मुश्किल, फेफड़े को नुकसान, नाइट्रोजन डायऑक्साइड से गले और फेफड़े में संक्रमण की आशंका होती है.

दिल्ली में प्रदूषण के पांच कारण
मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ की रिपोर्ट में दिल्ली में प्रदूषण के पांच कारण बताए गए हैं. इनमें पहला कारण बाहरी राज्यों से आने वाली करीब 45 लाख गाड़ियां और दिल्ली में जरुरी सामान पहुंचाने वाले ट्रक हैं. प्रदूषण का दूसरा कारण उद्योग और लैंडफिल साइट हैं जिनके चलते करीब 23 फीसदी प्रदूषण होता है. तीसरा कारण दिल्ली की हवा में मिला हुआ दूसरे राज्यों का धूल, कण और धुंआ है. चौथा कारण दिल्ली 


में चलने वाला कंस्ट्रक्शन और लोगों द्वारा जलाने वाला कूड़ा है. इनसे दिल्ली में करीब 12 फीसदी प्रदूषण होता है. प्रदूषण का पांचवा कारण दिल्ली के रिहायशी इलाके हैं, जहां रसोई से निकलने वाले धुंए, DG सेट जैसी चीजों से करीब 6 फीसदी प्रदूषण होता है.राजधानी दिल्ली के साथ ही देश के कई शहरों में प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर है. देश के 10 सबसे पॉल्यूटेड शहरों की बात करें तो इनमें दिल्ली, बुलंदशहर, बाघपत, कानपुर, गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद, ग्रेटर नोएडा, मुजफ्फरपुर और लखनऊ शामिल है. इन सभी शहरों में प्रदूषक तत्व पीएम 2.5 स्तर है. इन शहरों में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 340 से 450 के बीच है

आइये जानते हैं इस प्रदूषण से बचने के तरीके
1. बढ़ते प्रदूषण का बड़ा कारण गाड़ियां हैं, ऐसे में कम से कम वाहन का इस्तेमाल करें. आप आने जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर सकते हैं.
2. घर के बाहर मास्क लगाकर निकलें. प्रदूषण से बचने के लिए एन-95 से ऊपर के ही मास्क खरीदने चाहिए. ये मास्क आपको सूक्ष्म कणों से भी बचाते हैं.
3. खतरनाक प्रदूषण स्तर पर घर के बाहर कसर


त करने से बचें.
4. घर में साफ सफाई का ध्यान रखें, धूल और मिट्टी जमा न होने दें.
5. ऐसे प्रदूषण में कई लोगों को सांस लेने में ज्यादा पेरशानी होती है, ऐसे में डॉक्टर को जरूर दिखाएं.
6. अपने घर में अच्छा वातावरण बनाएं, घर में पौधे लगाएं जिससे आपको शुद्ध हवा मिल सके.
7. ऐसे वातावरण में बाहर से घर वापस आने के बाद  मुंह, हाथ और पैर साफ पानी से धोएं.
8. आप अपने घर में शुद्ध हवा के लिए एयर प्यूरीफायर लगवा सकते हैं.

Monday, October 15, 2018

कहानी एक लेडीज़ पार्लर चलाने वाले पुरुष की

उत्तराखंड के छोटे शहर रुड़की में शायद मैं पहला या दूसरा मर्द था जिसने कोई लेडीज़ पार्लर खोला था.
मेरी इस च्वाइस पर मेरे जानने वाले तो नाक-भौंह सिकोड़ते ही थे, महिला कस्टमर्स में भी हिचकिचाहट थी.
पड़ोसी तरह-तरह की बातें बनाया करते और कहते कि लेडीज़ पार्लर तो लड़कियों का काम है.
लड़कियों को मनाना, उनका विश्वास जीतना और यह बताना कि मैं भी किसी लड़की से कम अच्छा मेकअप नहीं कर सकता, बहुत मुश्किल था.
अगर कोई लड़की मेरे पार्लर में आती भी थी तो उनके पति, भाई या पिता मुझे देखकर उन्हें रोक देते. वो कहते, अरे! यहां तो लड़का काम करता है.
लड़कियां मुझसे थ्रेडिंग तक करवाने से साफ़ इनकार कर देती. 8X10 के कमरे में शायद एक लड़के का उनके क़रीब आकर काम करना उन्हें असहज करता था.
सवाल मेरे ज़हन में भी थे. क्या लड़कियां मुझसे उतना ख़ुल पाएंगी जैसे एक पार्लर वाली लड़की को अपनी पसंद-नापसंद बता पाती हैं.
ऐसा नहीं कि मुझे इस सबका अंदाज़ा नहीं था. लेकिन जब अपने मन के काम को बिज़नेस में बदलने का मौका मिला तो मैं क्यों छोड़ता?
शुरुआत दरअसल कई साल पहले मेरी बहन की शादी के दौरान हुई. उसके हाथों में मेहंदी लगाई जा रही थी और वो मेहंदी लगाने वाला एक लड़का ही था.
बस लड़कपन की उस शाम मेरे दिलो-दिमाग में मेंहदी के वो डिज़ाइन रच-बस गए.
कोन बनाना सीखा, कागज़ पर अपना हाथ आज़माया और फिर मैं भी छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में मेहंदी लगाने लगा.
कुछ दिन बाद जब घर पर इस बारे में पता चला, तो खूब डांट पड़ी.
पापा ने सख्त लहज़े में कहा कि मैं यह लड़कियों जैसे काम क्यों कर रहा हूं. वो चाहते थे कि मैं उन्हीं की तरह फ़ौज में चला जाऊं.
लेकिन मुझे फ़ौज या कोई भी दूसरी नौकरी पसंद ही नहीं थी.
फिर एक बार मैं एक शादी में गया और वहां मैंने औरतों के हाथों में मेहंदी लगाई जो काफ़ी पसंद की गई. इसके एवज़ में मुझे 21 रुपए मिले.
मेरी जीवन की ये पहली कमाई थी. मेरी मां और भाई-बहन मेरे शौक को पहचान चुके थे लेकिन पापा को ये अब भी नागवारा था.
हारकर मैं हरिद्वार में नौकरी करने लगा. सुबह नौ से पांच वाली नौकरी. सब ख़ुश थे क्योंकि मैं मर्दों वाला काम कर रहा था.
पर मेहंदी लगाने का शौक़ मेरे दिल के एक कोने में ही दफ़्न होकर रह गया.
रह-रहकर एक हूक सी उठती कि इस नौकरी से मुझे क्या मिल रहा है. ना तो बेहतर पैसा ना ही दिल का सुकून.
इस बीच लंबी बीमारी के बाद पापा चल बसे, घर का ख़र्च चलाने की ज़िम्मेदारी अचानक मेरे कंधों पर आ गई.
लेकिन, इसी ज़िम्मेदारी ने मेरे लिए नए रास्ते भी खोल दिए. मैं जब छुट्टी पर घर आता तो शादियों में मेहंदी लगाने चला जाता.
यहां मेरी महीने की तन्ख्वाह महज़ 1,500 रुपए थी, वहीं शादी में मेंहदी लगाने के मुझे करीब 500 रुपये तक मिल जाते थे.
शायद कमाई का ही असर था कि अब परिवार वालों को मेरा मेहंदी लगाना ठीक लगने लगा था.
उसी दौरान मुझे पता चला कि ऑफिस में मेरा एक साथी अपनी पत्नी के ब्यूटी पार्लर में उनकी मदद करता है, और दोनों अच्छा-खासा पैसा कमा लेते हैं.
मन में कौंधा, की क्यों न मैं भी अपना एक ब्यूटी पार्लर खोल लूं?
लेकिन यह सुझाव जब मैंने अपने परिवार के सामने रखा तो एकाएक सभी की नज़रों में बहुत से सवाल उठ खड़े हुए. वही लड़कियों का काम - लड़कों का काम वाले सवाल.
पर ठान लो तो रास्ते ख़ुल ही जाते हैं.
मेरे मामा की लड़की ब्यूटी पार्लर का काम सीख रही थी. उसने वही सब मुझे सिखाना शुरू कर दिया.
और फिर हमने मिलकर एक पार्लर खोला. शुरुआती दिनों की चुनौतियां भी उसी की मदद से हल हुईं.
पार्लर में मेरे अलावा, मेरी बहन यानी एक लड़की का होना महिला कस्टमर्स का विश्वास जीतने में सहायक रहा.
हमने अपने छोटे से कमरे में ही परदे की दीवार बना दी. मेरी बहन लड़कियों की वैक्सिंग करती और मैं उनकी थ्रेडिंग और मैक-अप.
उम्र और अनुभव के साथ मैं अपने काम की पसंद के बारे में मेरा विश्वास और बढ़ गया था.
शादी के लिए लड़की देखने गया तो उसने भी मुझसे यही सवाल किया, ''आखिर यह काम क्यों चुना?''
मेरा जवाब था, ''यह मेरी पसंद है, मेरी अपनी च्वाइस.''
उसके बाद से आज तक मेरी पत्नी ने मेरे काम पर सवाल नहीं उठाए.
वैसे भी वो मुझसे 10 साल छोटी है, ज़्यादा सवाल पूछती भी कैसे.
शादी के बाद मैंने पत्नी को ब्यूटी पार्लर दिखाया, अपने कस्टमर और स्टाफ से भी मिलवाया. मैं चाहता था कि उनके मन में किसी तरह का कोई शक़ ना रहे.
पिछले 13 साल में 8x10 का वो छोटा सा पार्लर, तीन कमरों तक फैल चुका है.
अब रिश्तेदार भी इज़्ज़त करते हैं और मुझे ताना देनेवाले मर्द अपने घर की औरतों को मेरे पार्लर में खुद छोड़कर जाते हैं.
(ये कहानी एक पुरुष की ज़िंदगी पर आधारित है जिनसे बात की बीबीसी संवाददाता नवीन नेगी ने. उनकी पहचान गुप्त रखी गई है. इस सिरीज़ की प्रोड्यूसर

Monday, October 8, 2018

研究称气候变化恐削弱电力生产

今天,一项新的研究警告称,全球升温将会减少河流湖泊的水源供给,从而给多种发电形式产生至关重要的影响。因此,各国政府和全球能源行业需要采取重大措施加以应对。

水力、燃煤、燃气、核能和生物质发电量目前占据全球电力产量的98%。这些电厂的有效运转依赖于充足的供水,对淡水供应的需求很大。受气候变化、污染和全球人口不断增长的影响,淡水资源已经十分紧张。

刊登在环保类期刊《自然气候变化》上的这项研究表明,预期气温上升有可能会进一步造成河流湖泊水量减少、内陆水域水温升高,从而导致发电量降低。


国际应用系统分析研究所( )项目主管兼报告共同作者  表示,“这是首次从全球角度对气候变化、水资源、电力生产之间的关系进行研究。我们清晰地指出:发电厂不仅会导致气候变化,同时也是气候变化的受害者。”

该研究将美国、拉丁美洲南部、南非、中欧和南欧、东南亚、南澳大利亚列为最脆弱地区。气候变化将有可能最大程度地影响这些地区驱动水力涡轮发电机或参与燃煤和核能发电厂冷却环节的水资源的供应。

2040年到2069年,气候变化对水资源供应的影响将有可能波及世界60%的发电厂。在该阶段,若要切实避免气候发生不可挽回的变化,世界各国就需要实现从煤炭向其他资源的转移。

前兆


在过去几十年里,多例极端气候事件已经向各国政府和能源公司发出了一个信号:气候变化将有可能会给电力行业带来严重的破坏,造成电力供应中断,以及重大的经济损失。

由于常年干旱,美国西部地处“阳光地带”的一些高速发展的城市已经开始打算另辟蹊径,不再依赖胡佛大坝等大型水利设施来满足其电力需求。

2003年,欧洲西北部地区遭受了极端热浪。由于河水温度不断升高严重影响了电厂的冷却系统,多家核电厂被迫关闭。前几年,中国西部地区降水过少导致水力发电量减少。在降水量上升到接近正常水平之前,当地电网不得不重新依靠燃煤电厂供电。

包括中国、印度在内的许多国家都在各自的气候计划,即12月份签订的《巴黎协议》的基础文件《国家自主贡献》( )中着重强调要大力开发水电资源。

由于原子能成本不断增加,核电并未像水电那样受到重视。但是对于印度等计划扩大燃煤发电的国家来说,水资源短缺将有可能威胁其未来的电力供应。

如何应对

  的研究建议各国提高电厂能效,并鼓励安装能够能应对供水不足状况的冷却系统。该项研究的负责人米歇尔
•冯丽德指出,在干旱时期,各国政府以及电力公司应当有效调节供水。

他还表示,除了减排之外,电力行业还需要加强适应气候变化的能力。

气候活动家们希望《巴黎协议》确定的2℃和1.5
℃的温升目标、以及长期脱碳计划能够鼓励风能和太阳能的发展,从而能够更快地取代煤炭。相较于热能发电和水电,风能和太阳能技术对水的依赖程度更低。

发展中国家希望富裕国家兑现他们的承诺,提供资金帮助其他国家应对全球气温上升带来的影响、提供包括电力供应设备在内能够抵御气候变化的关键基础设施。

不论是发展中国家,还是发达国家,都将不得不应对气候变化导致的洪水等与水资源相关的问题。去年12月份,英国降水量创下了有史以来的新纪录,造成许多配电站被淹,导致电力中断,数以万计的居民受到影响。而由此造成的高额赔偿也引起了世界各大再保险公司和金融监管部门
越来越多的关注。

Tuesday, October 2, 2018

छत्तीसगढ़: हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति का इस्तीफ़ा

छत्तीसगढ़ की हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सुखपाल सिंह ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.
यूनिवर्सिटी के आठ सौ से अधिक छात्र-छात्राओं ने कुलपति के ख़िलाफ़ गंभीर आरोप लगाते हुए उनपर 'अविश्वास' जताया था और पिछले सात दिनों से छात्र-छात्राएं आंदोलन कर रहे थे.
इन आंदोलनकारियों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरु कर दी थी. इसके बाद सोमवार की शाम को ही कुलपति के इस्तीफ़े की बात सामने आई.
डॉ. सुखपाल सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "इतने अपमान के बाद इस पद पर रहने का कोई मतलब नहीं है. इसलिए मैंने यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस्तीफ़ा दे दिया है."
डॉ. सुखपाल सिंह को 5 मार्च 2011 को रायपुर के हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी का कुलपति नियुक्त किया गया था. ये नियुक्ति पांच साल या 65 वर्ष तक की आयु के लिए की गई थी.
इसके बाद 6 सितंबर 2014 को नियम में बदलाव कर उनकी सेवा अवधि में विस्तार कर दिया गया. नए नियम के तहत ये नियुक्ति पांच साल या 70 वर्ष तक की आयु के लिए की गई थी.
इसे सेवावृद्धि के ख़िलाफ़ यूनिवर्सिटी के ही सहायक प्राध्यापक डॉ. अविनाश सामल ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसे हाईकोर्ट की एकल पीठ ने तो खारिज कर दिया लेकिन इसी साल 27 अगस्त को हाईकोर्ट की युगल पीठ ने डॉ. सुखपाल सिंह की सेवावृद्धि के आदेश को रद्द कर दिया.
इस बीच 27 अगस्त से ही यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में छात्राओं की यौन प्रताड़ना और आर्थिक भ्रष्टाचार समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू कर दिया. पिंजरा तोड़ो' नाम से शुरू किए गए इस आंदोलन में इन विद्यार्थियों की मांग थी कि यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले लड़के-लड़कियों को 24 घंटे कैंपस के भीतर कहीं भी आने-जाने की छूट मिले. इसके अलावा यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी भी 24 घंटे खुली रखी जाए. साथ ही यूनिवर्सिटी की कार्य परिषद की बैठकों की कार्रवाई सार्वजनिक की जाए.
इस दौरान 60 से अधिक लड़कियों ने अपने साथ यौन प्रताड़ना की शिकायत करते हुए मांग की कि जिन शिक्षकों पर आरोप लगे हैं, उन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित रखा जाए.
इस आंदोलन को देश भर से समर्थन मिला और दस दिनों तक चले आंदोलन के बाद अंततः प्रभारी कुलपति रविशंकर शर्मा ने इन मांगों पर कार्रवाई भी शुरू की. रात तीन बजे तक यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी और रात सवा तीन बजे तक हॉस्टल खुले रखने की शुरुआत भी कर दी गई.
यौन प्रताड़ना, आर्थिक भ्रष्टाचार, बजट, कार्य परिषद के फ़ैसले जैसे कई मुद्दों पर यूनिवर्सिटी ने तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए.
कुछ मामलों में जांच के लिए कमेटी भी बनाई गई.
इन प्रदर्शन और कार्रवाइयों के बीच ही 20 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. सुखपाल सिंह की सेवावृद्धि को रद्द करने के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी.
24 सितंबर को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुलाधिपति ने फिर से डॉ. सुखपाल सिंह की नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया. लेकिन अगले दिन जब डॉ. सुखपाल सिंह यूनिवर्सिटी पहुंचे तो विद्यार्थियों ने फिर से उनके ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया.
स्टूडेंट्स बार एसोसिएशन के आकांश जैन कहते हैं, "डॉ. सुखपाल सिंह ने अपने कार्यकाल में लगातार भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया, सारी शिकायतों की अनसुनी की, लड़कियों के साथ यौन प्रताड़ना को कभी गंभीरता से नहीं लिया. आख़िर उनके रहते हम यूनिवर्सिटी में बेहतर शैक्षणिक वातावरण की कल्पना भी कैसे कर सकते थे?"
25 सितंबर को आंदोलनकारी छात्रों ने कुलपति के ख़िलाफ़ 800 हस्ताक्षरों के साथ उन्हें 'अविश्वास प्रस्ताव' सौंपा और 48 घंटों के भीतर कुलपति पद से इस्तीफ़ा देने की मांग की. इसके बाद छात्रों ने 28 सितंबर को कुलपति के तौर पर डॉ. सुखपाल सिंह को मान्यता देने से इनकार करते हुए, कुलपति को ही एक और पत्र सौंपा.
इस बीच शनिवार को बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एके त्रिपाठी से छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की. लेकिन ये मुलाकात बेनतीजा रही. इसके बाद छात्रों ने सोमवार से भूख हड़ताल की घोषणा कर दी.
कुलपति डॉ. सुखपाल सिंह ने भी 30 सितंबर को छात्रों के लिए चेतावनी जारी की कि अगर 1 अक्टूबर तक छात्रों ने अपना विरोध प्रदर्शन बंद नहीं किया तो यूनिवर्सिटी उचित कार्रवाई कर सकती है. इसके तहत यूनिवर्सिटी में सामान्य स्थिति की बहाली के लिए यूनिवर्सिटी को अनिश्चितकाल तक के लिए बंद करना भी शामिल है.
लेकिन सोमवार को छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी. इस आंदोलन को विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस समेत कई दूसरे राजनीतिक दलों का भी समर्थन प्राप्त था. इस भूख हड़ताल के समर्थन में राज्य के अलग-अलग इलाकों में कुछ विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को भी बंद कराया गया.सके बाद शाम होते-होते कुलपति डॉ. सुखपाल सिंह के इस्तीफ़े की ख़बर आ गई.
स्टूडेंट्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष स्नेहल रंजन शुक्ला कहते हैं, "तमाम तरह के गंभीर आरोपों से घिरे कुलपति के ख़िलाफ़ हमारे पास भूख हड़ताल अंतिम रास्ता था, हमने तय किया था कि भूख हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक कुलपति इस्तीफ़ा नहीं दे देते. आज हमारी यूनिवर्सिटी आज़ाद हो गई है. "

Monday, September 10, 2018

राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बीच वरुण गाँधी और शत्रुघ्न सिन्हा कहां थे?

इसके अलावा यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी भी 24 घंटे खुली रखी जाए. यूनिवर्सिटी के कार्य परिषद की बैठकों की कार्रवाई सार्वजनिक की जाए.
इसके अलावा यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली लड़कियों की यौन प्रताड़ना के लिए ज़िम्मेदार शिक्षकों को जांच तक निलंबित किया जाए.
साथ ही यूनिवर्सिटी में आर्थिक भ्रष्टाचार करने वालों को भी निलंबित कर उनके ख़िलाफ कार्रवाई की जाए.
27 अगस्त से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे परवान चढ़ता गया और फिर पांचवें दिन तक देश भर से इस आंदोलन को समर्थन मिलना शुरू हो गया.
छात्र संगठनों से लेकर मानवाधिकार संगठन और राजनीतिक दल भी इस आंदोलन के पक्ष में उतर आए.
प्रभारी कुलपति ने 29 अगस्त को ही छात्रों की अधिकांश मांग मान लेने का आश्वासन दिया था. लेकिन पुराने अनुभवों को देखते हुए छात्र बिना लिखित वादे के अपना प्रदर्शन ख़त्म करने के लिए राजी नहीं हुए.
आंदोलन जारी रहा और लगभग 900 लड़के-लड़कियों की ओर से जब भूख हड़ताल शुरू करने की बात कही गई तो फिर प्रभारी कुलपति सामने आए.
कुलपति ने लिखित में आश्वासन दिया और फिर उन्हें पूरा करने की मियाद भी मांगी. पहले ही दिन से रात तीन बजे तक यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी और रात सवा तीन बजे तक हॉस्टल खुले रखने की शुरुआत भी कर दी गई.
राज्य के विधि मंत्री महेश गागड़ा कहते हैं, "छात्रों ने मुझसे मुलाक़ात की थी. देर रात तक लाइब्रेरी खुली रखने की मांग मुझे न्यायसम्मत लगी."
यौन प्रताड़ना, आर्थिक भ्रष्टाचार, बजट, कार्य परिषद के फ़ैसले जैसे कई मुद्दों पर यूनिवर्सिटी ने तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. कुछ मामलों में जांच के लिए कमेटी भी बनाई गई, जो तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी.
स्टूडेंट बार असोसिएशन के उप संयोजक आकाश जैन का कहना है कि रात को होस्टल कैंपस, मेस और लाइब्रेरी खोलने की हमारी मांगें एक हद तक ज़रूर पूरी की गई हैं, लेकिन हमारा आंदोलन अभी ख़त्म नहीं हुआ है.
जैन कहते हैं, "आज भी हमने क्लास शुरू होने से एक मिनट का मौन रख कर सांकेतिक विरोध जारी रखा है. हमने अपनी सारी मांगें पूरी करने के लिए 24 सितंबर की समय सीमा तय की है. सारी मांगें अगर इस समय सीमा तक पूरी नहीं हुईं तो हम फिर से प्रदर्शन के लिए उतरेंगे."प्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और भारत के उपराष्ट्रपति रहे मोहम्मद हिदायतुल्ला की स्मृति में 2003 में स्थापित इस आवासीय यूनिवर्सिटी में एलएलबी ऑनर्स और एलएलएम की पढ़ाई होती है.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर इस यूनिवर्सिटी के कैंपस में ही लड़के और लड़कियों के होस्टल हैं, जहां देश भर से चयनित विद्यार्थी रहते हैं.
शुरू से ही अलग-अलग विवादों में घिरी इस यूनिवर्सिटी में ताज़ा विवाद की शुरुआत 27 अगस्त को हुई, जब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने यूनिवर्सिटी के कुलपति पद पर फिर से डॉ. सुखपाल सिंह की नियुक्ति को अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया.
डॉ. सुखपाल सिंह के दूसरे कार्यकाल की नियुक्ति को यूनिवर्सिटी के ही एक प्रोफ़ेसर अविनाश सामल ने चुनौती दी थी.
हाई कोर्ट का फ़ैसला जिस दिन सामने आया, उसी शाम को यूनिवर्सिटी कैंपस स्थित लड़कियों के होस्टल के गेट में रात साढ़े दस बजे के बाद ताला बंद करने के मुद्दे पर प्रदर्शन शुरू हो गया.
रात भर प्रदर्शन चला और फिर अगले दिन प्रदर्शन के साथ कुछ और मांग जुड़ती चली गईं.
आठ दिन तक आंदोलन चला और फिर लिखित में जब अधिकांश मांगें मान ली गई हैं तो अब एक-एक कर सभी मांगों पर अमल करने की बारी है.
लेकिन फिलहाल तो देर रात तक यूनिवर्सिटी कैंपस में घूमने, पढ़ने और लाइब्रेरी में बैठने की इजाज़त से ही कैंपस में जश्न का माहौल है.
यूनिवर्सिटी में थर्ड इयर की छात्रा अनुष्का वर्मा कहती हैं-"मुझे अब तक गार्ड की सीटी सुनाई नहीं पड़ी है. मैं चाहती हूं कि इस देश के अंदर जितनी भी यूनिवर्सिटी हैं, जहां लड़कियां पिंजरों के अंदर बंद हैं, जहां लड़कियों को पिंजरों से निकलने की इजाज़त नहीं है, वो इस आज़ादी को महसूस करें, उन्हें भी यह आज़ादी मिले. उनके भी पिंजरे पिघलें."

Friday, September 7, 2018

乐施会警示气候灾害

根据国际救援机构乐施会的报告显示,预计到2015年,全球受气候危机影响的人数将增长54%,即达到3.75亿人。而这将严重威胁人道主义援助制度的开展。在新的报告《生存的权利》中,乐施会表示世界需要改变对灾难预防、准备和应对的方式。

乐施会认为,对于易受气候事件影响的极度贫穷人口和人口密集贫民窟里的移民,预计的数据增长将提升他们对援助的需求。该组织认为,应对这些风险的政治失误和不完善的人道主义援助机制将让情况更复杂。


1980年以来,已有6500起气候相关的灾难被记录。乐施会根据这些数据预计,受气候灾害影响的人数在未来六年内将增加1.33亿至3.35亿。这还不包括战争、地震和火山爆发等事件的影响。


乐施会表示,仅仅为了应对越来越多的数目,世界对人道主义援助的支出在2006年142亿美元的水平上,将每年至少增加250亿美元。乐施会指出,即使这一增长意味着每个受影响的人将得到50美元的资助,但仍然不足以满足他们的基本需要。

乐施会正在启动他们认为有史以来最雄心勃勃的运动——“此时此地”,以帮助解决影响气候变化的根本原因。它的目的在于5年内筹集约6千万美元用于气候变化工作,同时动员公众支持更公平地对待世界上最贫穷和最脆弱的人民。
据英国《卫报》报道,一项针对全球水系的研究表明,包括中国黄河、南亚恒河以及西非尼日尔河在内的多条世界大河,都在受到气候变化的影响而逐渐干涸。美国国家大气研究中心发现,人口密集的流域受到影响最为严重。

研究称,这种现象会潜在威胁数百万生活在这些世界最为贫穷区域人口的食品和饮水供给。研究中心的凯文·特伦伯斯说:“在赤道附近,这种水系缩减带来的结果是致命的,但是受害最深的是非洲。可以预见大规模降水会增强,并伴随更大的洪涝危险,而间隔干旱期也会更长。因此,水文管理会越发艰难。”

科学家们检测了从1948年至2004年间,925条、代表世界水源水系73%河流的数据记录和计算机模拟流域模型。他们发现,气候变化将近影响了1/3的主要河流,而两倍于此的河流经历了水流下降和水位升高。

研究显示,如中国长江和印度布拉马普特拉河等其他亚洲大河水流保持稳定或有所升高。然而科学家们警告,由于喜马拉雅冰川逐渐消融,这些河流也可能要开始萎缩。
本周三是世界地球日第39周年,该庆祝活动始于1970年,目的是为了培养环保意识和对地球环境的珍视。华盛顿地区的地球日网站指出,在联合国为年末在哥本哈根召开的气候大会的准备期间,2009年的地球日“必须成为行动的一天并且全民参与”。为了记录这一天,一个“绿色一代”的环保活动将被实施。

绿色一代的“核心理念”是:“消除人类对矿物燃料的依赖性,致力于可再生能源的开发利用,创造一 个“无炭”的未来”;承诺个人“消费习惯与可持续发展要求相符合”;以及“建立一个新的绿色经济,通过为贫困人群创造数百万优质‘绿色岗位’使其脱贫和转 变全球教育体系为环保型。”

世界各地的学校、社区、村镇和城市策划了成千上万的庆祝活动。此外,美国各城市将举办一系列大规模的志愿者活动。地球日网络称其在北京、东京、布宜诺斯艾利斯、马尼拉及其他地区的合作伙伴正在策划一些公众活动以便让每个人都能参与其中。

该组织称,“人们越来越多的聚集在一个绿色活动中,毫无疑问地,这将像社会和工业历史上其他有纪念意义的改变一样,甚至更加出彩。”许多“未来主义”的作家称,当一个致力于生活和可持续发展的时代开始时,相信历史会见证这段时期。

世界地球日网络预计在明年4月22日的第40个地球周年纪念日“绿色一代”项目中达到高潮—“这标志着一个个人、全民、政府负责保护地球的新时代的开始。”

Tuesday, September 4, 2018

给苹果继任者的一封公开信

在对苹果公司供应商污染问题的新一轮谴责声中,国际CSR 咨询师乔舒华给世界IT巨头苹果公司乔布斯的继任者写了一封公开信。此信在7月10号原信的基础上更新。
苹果公司你好:
我从未料想自己会给你写这封信,然而它的重要性促使我开始动笔。自从大学毕业,我就摒弃了激进分子惯用的口吻,转身投入到促进公司更加开明而保持世界可持续发展之事业的洪流中。长久以来,我与众多企业合作以助它们达到绿色环保,具有社会负责感且充满竞争力的目标。所以,请不要将此视为一个纯粹环保主义者的来信。
此封来信同时也是对贵公司的一份警告,即目前你已深陷泥沼。在我上一次去中国之前,在公众与环境研究中心马军让我看那些即将被曝光的环境损害证据之前,我仍旧以为中国的供应链在你的掌控之下,而中国社会对富士康工厂的不满已经使你得到警省,意识到在制造所谓的“梦幻”产品的同时也应当遵循严格的社会及环境准则。最初你对自身电子产品中的冲突矿石的来源采取回避态度,我也认为你只是将此作为一种遮掩的手段,以期望在和产业创新者,政府监控者和供应者合作的时候免受牵连。对于供应商社会责任以及采购,你的目标清楚地写在你发布的《苹果“供应商责任”进展报告2011》中。你们写道:“我们要求我们的供应商提供安全的工作环境,对待工人予以尊严和尊重,凡是苹果产品制造之处一律使用环保制造工艺。”
但是,马军出示给我的证据令人震惊。这些关于你供应链环境的不当管理的证据让我如此之难过,不得已提笔写下(现在是更新)这封信且将它发表在网络上。马军,中国最有声望的环保组织之一的领军人,联系到你们并且提出帮助净化你们的供应链,但是你们却拒绝了他的提议。
这到底是怎么回事?莫非你认为中国的公民社会太过软弱了,还不足以揭发你?或者你们觉得你们的非华人顾客们不会去关心那些住在他们甚至读不出名字的中国工业区里的居民们?亦或你寄托于通过屏蔽信息来解决一切吗?
亡羊补牢,未为晚矣!上世纪90年代末,面对在血汗工厂制造产品的指控,耐克公司曾选择坐而无视。如果你不想重蹈它的覆辙,“重新考虑”一下吧!而你面对真相的回应,从某种程度上也将决定了你的诚信,道德底线和品牌。

因此你应该采取以下行动:
1.承担责任:你应该实时对外宣布将尽一切努力令供货商的工厂停止制造污染。   2.建立与形象相称的原则:确保你的生产线和你的产品一样的完美无瑕,你的供应厂房排出的污水也和你的网站、连锁店一样的洁净无瑕。   3.提高透明度:你应该向环保组织、媒体和监管机构公开供应链数据,他们不但不会偷取或出售你的商业机密,甚至会为你未来的危机把关,助你建立公众信心。你应该主动与他们联络,一旦发生事故时,他们会在通知传媒前与你商讨对策。
4. 成为科技产业的环保先驱:采用第三方认证的标准或守则可证明你的环保工作比你的竞争对手做的还要好,令他们效法你成为可持续发展企业。支持非政府组织工作,这样他们也可以监测你的竞争对手。难道你真的落伍了,甘愿在这方面继续比别的计算机生产商还要逊色?
5.评估成效和沟通:杰出的化学企业的供应链管理工作都做得比你好,而且他们很多都会评估进度且每年都有进步。虽然现在人们一般联想不到你的产品与直接污染物的关系,但是这一切正在改变。
6.将你的产品卷标为环保性质:推广类似于电子产品环境影响评估工具( )这种用一揽子的社会和环境指标的标准,然后在销售点把 有关的资料以金、银和铜三种颜色的标签展示。如果你认为不需要做这种事情,其他人都会要求你去做。
7.道歉:每个人都会犯错,即使是美国加州的科技巨头也不例外。
8.尽快行动:一个害群之“果”,我们真的不想看到类似状况发生。
这里我并没有想要冒犯你们公司的意思,只希望提出建设性的意见而已。你们只需要作出顾客想看到的改变,要不然他们不会再愿意购买你们的产品,不论你们的产品是多么的优越。   事实胜于雄辩。

Friday, August 31, 2018

जारी हुए एडमिट कार्ड, देखें- परीक्षा का पूरा शेड्यूल

रेलवे भर्ती बोर्ड ग्रुप 'सी' की परीक्षा के बाद जल्द ही ग्रुप 'डी' की परीक्षा का आयोजन किया जाएगा. जो उम्मीदवार लंबे समय से इस परीक्षा के एडमिट कार्ड का इंताजार कर रहे हैं उनके लिए ये खुशी की खबर है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ग्रुप 'डी' की परीक्षा सितंबर में आयोजित की जाएगी. वहीं एडमिट कार्ड अगले हफ्ते जारी कर दिए जाएंगे. उम्मीद जताई जा रही है एडमिट कार्ड अगस्त के अंत तक जारी कर दिेए जाएंगे.  जैसे ही ग्रुप डी के एडमिट कार्ड जारी हो जाएंगे, उम्मीदवार भारतीय रेलवे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं.
आपको बता दें, रेलवे ग्रुप सी और ग्रुप डी भर्ती में कुल 2.37 करोड़ उम्मीदवारों ने आवेदन किया है. रेलवे ने मार्च में विभिन्न विभागों में एक लाख पद भरने के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया था. जिसमें असिस्टेंट लोको पायलट और तकनीशियन नौकरियों के लिए 50 लाख से अधिक ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए थे. वहीं 26,502 लोको पायलट और तकनीशियन पद और 62,907 ग्रुप डी पदों पर भर्ती होनी है.
हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन, ( ) ने हिमाचल प्रदेश टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट ( ) के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं. जो उम्मीदवार ये परीक्षा देने वाले हैं वह आधिकारिक वेबसाइट   org  पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं.
  : ऐसे डाउनलोड करें...
1.  सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइड पर जाएं.
2. ‘TET 2018’ पर क्लिक करें.
2. मांगी गई जानकारी भरें.
3. एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखने लगेगा.
4. अब डाउनलोड कर लें.
5. भविष्य के लिए प्रिंटआउट लेना न भूलें.
देखें पदों के अनुसार परीक्षा की तारीखें..
जेबीटी टीईटी: 2 सितंबर
शास्त्री टीईटी: 2 सितंबर
टीजीटी (गैर-चिकित्सा) टीईटी: 3 सितंबर
भाषा शिक्षक टीईटी: 3 सितंबर
टीजीटी (कला) टीईटी: 8 सितंबर
टीजीटी (मेडिकल) टीईटी: 8 सितंबर
पंजाब टीईटी: 9 सितंबर
उर्दू टीईटी: 9 सितंबर
कैसा होगा परीक्षा का पैटर्न
परीक्षा में 150 अंक के ऑब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जाएंगे. इसी के साथ परीक्षा का समय 150 मिनट होगा. जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों को पास होने के लिए 60 प्रतिशत अंक की जरूरत होगी.

दिल्ली में कक्षा 10 में दो बार फेल हो चुके विद्यार्थी अब सरकारी स्कूल में एक बार फिर एडमिशन नहीं ले सकते हैं. शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी किए गए सर्कुलर के अनुसार अब दसवीं कक्षा में दो बार फेल होने वाले स्टूडेंट्स को सरकारी स्कूल में दोबारा एडमिशन नहीं दिया जाएगा.
डीओई की ओर से कहा गया है, 'अगर कोई छात्र लगातार दो साल परीक्षा या कंपार्टमेंट परीक्षा में फेल हो जाते हैं तो उन्हें पत्राचार विद्यालय, एनआईओएस आदि के परामर्श दिया जाएगा. साथ ही उनको रेग्युलर स्टूडेंट के तौर पर फिर से एडमिशन नहीं दिया जाएगा.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार निदेशालय ने यह सर्कुलर एक छात्र की ओर से कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद जारी किया है. यह याचिका दोबारा एडमिशन नहीं देने के बाद दायर की गई थी. निदेशालय के अनुसार कंपार्टमेंट परीक्षा में फेल होने वाले विद्यार्थियों को सिर्फ बोर्ड परीक्षा देने की शर्त पर दोबारा एडमिशन दिया जाएगा.
40 हजार छात्रों को नहीं मिला एडमिशन
बता दें कि हाईकोर्ट में लगातार याचिकाएं दायर हो रही हैं, जिसमें बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला देने से इंकार करने और फेल बच्चों को दोबारा एडमिशन नहीं मिलने का आरोप है. ये बच्चे एक ही सरकारी स्कूल गोकुलपुरी के हैं और ये बच्चे दसवी में फेल हो गए. कई ऐसे बच्चे हैं जिनकी कंपार्टमेंट आई है, लेकिन वो दोबारा सफल नहीं हो पाए. बताया जा रहा है ऐसे छात्रों की संख्या करीब 40 हजार है.

Monday, August 27, 2018

北京似乎可自由调控天空

接受9月3日“中国人民抗日战争暨世界反法西斯战争胜利70周年”阅兵的,不仅有飞机、导弹、将士们,还有北京的空气质量。阅兵期间出现的所谓“阅兵蓝”比去年的“APEC蓝”还要蓝。
 
中国近年空气污染严重,但习惯在重大活动期间不惜代价控制空气质量。去年,北京空气严重污染,但在APEC会议期间,空气令人惊讶地突然好转。那是中国关闭大量工厂的结果。
 
这次阅兵,是中国领导人近年来规模最大的公开政治活动。在8月20日至9月3日,北京市空气质量创下PM2.5监测以来历史最好记录,平均浓度仅为18微克/立方米,同比下降73.1%。二氧化硫(SO2)、二氧化氮(NO2)、可吸入颗粒物(PM10)等各项污染物平均浓度也均达到了北京监测历史以来的最低水平。9月3日上午阅兵举行期间,PM2.5平均浓度仅为8微克/立方米。
 
北京市环保监测中心主任张大伟告诉媒体说,阅兵期间北京连续15天达到一级优水平,相当于世界发达国家大城市伦敦、巴黎、莫斯科等城市的年均浓度水平。
京津冀及周边地区70个城市空气质量总体良好,PM2.5平均浓度为35微克/立方米,其中52个可比城市同比下降34.0%。
 
9月7日环保部通报总结经验,称好空气来自于领导重视和一系列的强力措施。为确保活动期间的空气质量,国家领导人习近平、李克强等多次作出指示,提出明确要求。
 
在总结北京奥运会、 保障活动经验的基础上,环保部根据污染物来源解析结果,编制了保障工作方案。将北京附近70多个城市划分为重点控制区和一般控制区,提出了不同的污染防控要求。
 
这些地方共有12255家燃煤锅炉、工业企业及混凝土搅拌站停产限产。北京、天津、河北采取机动车单双号限行,即在两天内,一辆汽车只能行驶一天。
 
早在2015年8月初,为保证阅兵期间的空气质量,北京市政府就制定了《空气质量保障方案》。
 
北京市环保局大气环境管理处副处长梁文玥介绍了北京所采取的限排措施,他告诉媒体说,除私家车限行外,全市国家单位的公车停驶率达到80%以上;全市渣土运输车、混凝土罐车全部停运。全市共有1927家工业企业停限产,与去年APEC会议相比增加了15倍左右。
 
阅兵保障工作开展以来,环保法得到严格执行,如河北省立案侦办环境污染刑事案件21起,抓获犯罪嫌疑人19人,行政拘留35人;对被曝光的某公司罚款50万元,一些官员得到处置。
 
化解污染风险
 
北京市环科院副院长潘涛告诉媒体,北京和周边地区所采取的保障措施对降低PM2.5浓度起到了明显的效果。数值模拟表明,8月20日至9月3日,北京市PM2.5浓度平均下降约41%;如不采取保障措施,PM2.5浓度将比实际浓度增加约70%。
 
“此次空气质量保障措施实现的污染物减排比例及环境PM2.5浓度改善比例,略高于去年APEC空气质量保障。”潘涛说,这主要是因为9月1日至9月3日期间,北京及周边省区市又启动了应急减排措施,增加了减排量。
 
北京市环保监测中心主任张大伟说,8月27日前后,市环保监测中心预判9月2日至9月4日期间,北京地区由于风向等原因,是典型的污染积累的过程。
 
张大伟说,预测到9月3日阅兵当天存在空气污染的风险。针对这个风险,进一步找准主要的传输通道,因为北京已经采取了最严格的措施,而当时判断污染发生前期会有一些偏东风和偏南风,这样就将重点管控区确定在传输通道,偏东方和偏南方向,而不是整个7省区市区域。
 
他说,接下来确定重点控制的污染物,因为 .5中影响能见度最重要的成分是硫酸盐,而硫酸盐的主要来源是燃煤。但北京夏季已经基本无燃煤,硫酸盐基本都是区域传输,所以在传输通道中进一步确认要控制高架源。高架源都是大电厂、大钢铁厂、水泥厂等,这些企业排放量大,传输距离远,所以精确打击的目标锁定北京东部及南部的污染物传输通道上的高架源。

Thursday, August 16, 2018

强制从工资里扣生育基金这种建议是蠢还是坏

新华日报》在814日发了一篇《提高生育率:新时代中国人口发展的新任务》的文章引起了热议。文章提出,在未来二三年内,随着我国第三次人口高峰期的育龄妇女逐渐退出育龄期,以及全面二孩政策实施导致的生育堆积效应释放结束,我国的人口出生率必然面临断崖式下跌。文章由此建议,设立生育基金制度,尽量实现二孩生育补贴的自我运转。可规定40岁以下公民不论男女,每年必须以工资的一定比例缴纳生育基金,并进入个人账户。家庭在生育第二胎及以上时,可申请取出生育基金并领取生育补贴,用于补偿妇女及其家庭在生育期中断劳动而造成的短期收入损失。如公民未生育二孩,账户资金则待退休时再行取出。
坦率地说,当我第一时间看到“必须以工资的一定比例缴纳生育基金”的报道的时候,我以为是搞笑,但是,当我回去看文章的全文的时候,我发现媒体的报道没有搞笑,而是真有人这么建议。我在想,能够提出这种建议的人,脑细胞的结构究竟是如何构造的,才会提出这么雷人的既蠢又坏的提议,这是逗比,还是严肃的政策讨论?这种堂而皇之的言论,发在官方的媒体上,是在试探什么?
担心自己的智商不够理解如此宏大的建议,我认真读了这篇文章的全文。说实话,这篇文章尽管资料陈旧,基本都是我们以前讲过的话的罗列,大多数的建议我们在很早以前就建议过,但总体还是可行的。比如,立刻全面放开生育,我们呼吁了至少10年了。延长产假的呼吁,鼓励生育的呼吁等,对生孩子的家庭提供补贴等等。都是我们呼吁了又呼吁的,都属于正常合理范围内。不客气地说,在计划生育政策上,过去10年我们冒着极大的风险和一些体制内的学者、部门斗争,不断地告诉大家中国人口面临的极具严重的危险,甚至因此被有关部门约谈。计生问题不仅仅是一个简单的人口问题,研究越深入,涉及的利益发现越大。比如,在我们认为中国人口出生率实际已经很低,呼吁至少放开二胎的时候,中国人口学会的会长翟振武写了一篇文章预测,如果全面放开二胎,中国人都会争着生孩子,年出生人口高峰会达到4995万人,等于下至15岁的幼女,上至50岁的大妈都算上了,这种吓唬虽然缺乏基本的常识,但效果很有成效,决策者一看一年生这么多人,立即打消了全面放开二胎的想法,出台了不伦不类的单独二孩政策,结果人口出生率继续下滑,等到全面放开之后,2017年一年出生孩子1723万人,比2016年还少了63万人,这些专家吓唬的人口井喷没有出现,但雪崩如期而至。当然,对人口出生预测很荒唐的不仅仅是翟振武,还有社科院的几个大名鼎鼎的专家,我就不一一点名了,他们会被树在中国错误的生育政策的耻辱柱上反思,在人口问题上,他们犯的错误不可饶恕,他们对中国一再延误取消计划生育功不可没,他们对目前严峻的人口状况应该承担责任。
从计划生育到鼓励生育,这种理念的转换还需要我们继续呼吁,继续给大家普及常识,毕竟在中国很多人的观念里,“人多是负担”这种观念已经根深蒂固了。好在现在已经有很多人的观念已经转变过来,我们相信,取消计划生育指日可待。但是,我在过去的文章中也一再强调过,鉴于目前的人口状况,现在彻底废除了计划生育,如果没有更多的更有力的鼓励措施,降低大家生孩子养孩子的成本,消除生孩子的鼓励,生孩子的意愿仍然很难回升。中国生孩子的鼓励太多了,成本太高了,障碍太大了,这都是以前严格执行生育的结果,当人口出现断崖式下滑的时候,一切都猝不及防,但应该立即行动。过去限制生育是基本国策,现在应该把基本国策改为鼓励生育。但生育观念的改变,不能靠大家的自觉,更应该在政策层面予以鼓励。
我说的鼓励,是国家来买单,是国家承担生孩子的成本。我其实一直特别担心,有人会想办法把这个成本转嫁到个人头上。过去不让人生孩子,多生孩子罚款,交社会抚养费,这些钱每年去了哪里,根本不知道。现在要鼓励了,又想强制大家从工资里面扣“生育基金”,这些人忘记了,生孩子是人的一项基本权利,不是强制。生孩子也不是为一些人再次提供发财的渠道。从工资里扣生育基金本质上就是罚款!这是多么无耻和不要脸的建议。在这里,我要特别同情一下80后,你们真是幸运,如果这个专家的建议真的被采纳,你们可能要同时经历多生不生少生都要交罚款的人生轨迹,你们可以吹一辈子了。我这里要特别强调,放开计划生育,应该成为一项基本国策,但一些人绝不能在这上面打发财的主意,绝不能变着法子又想收钱,从个人工资里面扣生育基金这种想法无耻到没有下限。
不过这种无耻的想法不是没有一点正面意义。过去限制生育,超生的人都交了社会抚养费,这笔钱应该还在吧,因为我们没有看到这笔钱究竟用到哪里去了,多生孩子的抚养费都是家长自己买单。现在要鼓励生育了,先把这笔钱拿出来,学习日本,设立奖励生育基金,给生二孩以上的给予一定的奖励。不生孩子的怎么办?不生孩子也是人家的权利。我们的一些专家,一提建议不是限这个限那个,就是罚款交税。不生孩子,你们想着发财,生孩子,你们也想着发财,我提醒这些专家,人民不仅仅是交税和交配的!
最后我想说,中国人口面临的严峻态势比我们想象的要严重很多,今年上半年人口出生的状况比去年还要糟糕很多,下降幅度至少在10%以上。一定要抓紧构建鼓励生育的公共政策体系,在产假、孩子入托、幼儿教育、家庭负担减轻、税收减免、财政鼓励上下大功夫。以前搞计划生育的也不要担心失业,鼓励生育的工作量是远远大于抓计划生育的工作量。国家应该搞一个人口“四万亿”计划,拿出4万亿,为鼓励大家生孩子买单,这些钱哪里来?裁减行政人员即可,压缩行政经费即可,千万不要想着在别人工资里扣生育基金这种歪主意。